मुश्किलें हैं तो क्या MUSHKILEN HAIN TO KYA
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मुश्किलें हैं तो क्या
तुझे जीने की
आरज़ू मेरी अब तक
कम नहीं हुई तो क्या
मुश्किलों से डरूं ये ज़रूरी है क्या
डर के मेरी आरज़ू पूरी हो जायेगी क्या
तुझे पाने की तमन्ना ही ऐसी है
मुश्किलें हैं तो क्या
जाओ सो जाओ सूरज न्यारे
मेरी मुश्किलों की रात लम्बी है तो क्या
बिन उजाले अभी शाम साथ है मेरे
मुश्किलों भरी लम्बी रात
आने को है तो क्या
तेरी आरज़ू मुझे सोने नहीं देती ,
मेरी रात लम्बी है तो क्या
अभी सवेरे को होने में वक्त बहुत
लम्बी रात है तो क्या
आएगा सवेरा भी जल्द मेरा
अभी मेरा रात का लम्बा सफर है
तो क्या
मुश्किलें आती हैं
मुश्किलें आती रहेंगी
मुश्किलें हैं तो क्या
WRITTEN BY ROHIT CHAKRVERTY
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