PARTITION IN 1947 AND JOURNEY BY TRAIN
क्या पता उस वक्त कोई अपना भी मरा हो ,
पर गैर कहूँ किस को ,
न मारने वाला गैर था , न ही मरने वाला
बस फ़र्क यही था
कुछ ने धर्म के चश्मे से देखा
कुछ ने इंसानियत के
रेलगाड़ी को देखकर न जाने क्यों ?
मन सोच के भंवर में फँस जाता है ,
सोचता है कि क्या यही रेलगाड़ी
या ऐसी कोई रेलगाड़ी रही होगी ,
जो यात्रियों / राहियों की जगह
लाशों को लाई होगी
( Partition displaced fifteen million people and killed more than a million.
Photograph by Margaret Bourke-White / LIFE Picture Collection / Getty )
क्या रेलगाड़ी के पहिए खून
के कतरों से भीगे रहे होंगे
क्या वो खून बता पायेगा की वो कैसे गिरा
मरने वाले की लाश से या
मारने वाले के शरीर के किसी हिस्से से
( https://miro.medium.com/max/1160/0*m6rPEqbBMOetzGnl.jpg)
रामायण में सीता को अपवित्र समझा गया
विभाजन के बाद वो महिलाएं
जिनके साथ अमानवीय कृत्य किये गए
उन्हें भी मैला समझा गया
किसी ने सुध लेने की कोशिश न की
कि वो बेजान लाश , मरते दम तक लाश रही
WRITTEN BY ROHIT CHAKRVERTY
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