चलती रूकती , रुक कर फिर से चलने वाली ज़िन्दगी CHALTI ZINDAGI

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मैने ज़िन्दगी को कुछ यूं
करीब से देखा है कि
जिंदगी जो पहले मुझे एक लम्बा सफर लगती थी
जिस के छोटे छोटे स्टेशनों पर
जैसे मेरी ज़िन्दगी की रेल को रुकना था
यहां तो ये भी तय था
कि कहाँ किस वक्त और कितना रुकना है
पर इस सफर में
मैंने अपने आने वाले सभी स्टेशनों
कि फेहरिस्त तैयार कर रखी थी
मैंने ये न सोचा था
कि अगर मेरी ज़िन्दगी के सफर में
जब मेरी इस रेलगाड़ी में
मेरे साथ कई यात्री और भी होंगे
उस वक़्त रास्ते में कुछ रुकावटें आयी
और स्टेशन पर पहुंचने से पहले ही
मेरा सफर ख़त्म हो जाए
क्या मै अन्य यात्रियों से
ये कह पाऊंगा की
आपकी बची हुई यात्रा में
जो अब यहां से शुरू होगी
मेरे बिना शुरू होंगी
मेरा तो सफर ख़त्म
मेरी पहचान ख़त्म
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इस लकीर जैसी मेरी ज़िन्दगी अब
स्तब्ध है , रुक चुकी है
सफर बहुत बाकी था
अभी भी किसी के हिस्से में
जो अब गुज़रेगा मेरे इंतज़ार में
मैने यूं न चाहा था
कि ऐसा हो जाए
दिल में बहुत कुछ था मेरे
जिसे अभी बयाँ होना था
पर मेरे साथ मेरी वो सभी ख्वाहिशें
खत्म हुयी
जिन्हें मेने चाहा था
की किसी न किसी स्टेशन पर
में अपना दिल ए हाल
बयाँ करूंगा
पर अफ़सोस। .......................................................................................................................................
जिंदगी में कुछ भी PLAN मत करना आज ये कल ये करूंगा जो है बस अभी है जो कहना है अभी जो सुनना है वो अभी क्यूंकि कल किसने देखा है
WRITTEN BY ROHIT CHAKRVERTY
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