मत रोक इन्हें तू बहने दे आँसू ही तो हैं
मत रोक इन्हें तू बहने दे आँसू ही तो हैं दिल में उठती हुई लहरों की बातें ही तो हैं हवा के झोंकों की तरह ही तो हैं जो कब तुझे छू कर कब तेरे पास से गुजर जायेंगे तुझे पता ही न चलेगा किसी की याद में निकले या किसी के जाने के बाद निकले निकले तो यूँ निकले मानो समंदर भर देंगे मानो दिल को तसल्ली भी खूब देंगे आंसू ही तो हैं बहने दे इन्हें क्या इन के लिए भी कोई सीमा है जहां इन्हें भी बंध के रहना है तू तो ताउम्र बंधा रह गया ख्वाहिशों की ज़ंजीरों में क्या इंसान तू इन्हें भी बांधेगा मत कर ऐसा इन्हें बांधकर तू क्या इंसान कहलायेगा WRITTEN BY ROHIT CHAKRVERTY IF ANY SUGGESTION ALWAYS WELCOME DONT COMMENT USING GOOGLE ACCOUNT , BLOGGER NOT SUPPORTED GOOGLE ACCOUNT IN COMMENTS SECTION COMMENTS MAY BE DISAPPEARED IF YOU USE GOOGLE ACCOUNT FOR COMMENT