Posts

Showing posts from November, 2019

चलती रूकती , रुक कर फिर से चलने वाली ज़िन्दगी CHALTI ZINDAGI

Image
image address : https://gumlet.assettype.com/freepressjournal%2Fimport%2F2018%2F04%2FW_end_apr29_pg5_lead-april-29.jpg?format=webp&w=750 मैने ज़िन्दगी को कुछ यूं करीब से देखा है कि जिंदगी जो पहले मुझे एक लम्बा सफर लगती थी जिस के छोटे छोटे स्टेशनों पर जैसे मेरी ज़िन्दगी की रेल को रुकना था यहां तो ये भी तय था कि कहाँ किस वक्त और कितना रुकना है पर इस सफर में मैंने अपने आने वाले सभी स्टेशनों कि फेहरिस्त तैयार कर रखी थी मैंने ये न सोचा था कि अगर मेरी ज़िन्दगी के सफर में जब मेरी इस रेलगाड़ी में मेरे साथ कई यात्री और भी होंगे उस वक़्त रास्ते में कुछ रुकावटें आयी और स्टेशन पर पहुंचने से पहले ही मेरा सफर ख़त्म हो जाए क्या मै अन्य यात्रियों से ये कह पाऊंगा की आपकी बची हुई यात्रा में जो अब यहां से शुरू होगी मेरे बिना शुरू होंगी मेरा तो सफर ख़त्म मेरी पहचान ख़त्म ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- इस लकीर जैसी मेरी ज़िन्दगी अब स्तब्ध है , रुक चुकी है सफर बहुत बाक...