मंटो और विभाजन
वो हड्डियां कहाँ जलाई जाएंगी या दफ़नाई जाएंगी , जिन पर मज़हब का गोश्त चीलें नोच नोच के खा गए - सआदत हसन मंटो जब लाशों को दफन किया गया या जलाया गया होगा, तो क्या लाश पर कोई निशानी बची होगी , जो चीख चीख कर या चिल्ला कर अपने धर्म का पता दे रही होगी जो ये बताये की लाश के साथ क्या किया जाए , जलाया जाए या दफनाया जाया क्या बढ़ी हुयी दाढ़ी इसका सबूत दे पायी होगी, क्या जनेऊ इसका जवाब दे पाया होगा, क्या और निशानी भी रही होगी , न मालूम , क्या पता तो क्या हुआ होगा लाशों का , कहीं किसी हिन्दु की लाश को , मुस्लिम समझ कर कहीं दफना तो नहीं दी होगी, या किसी मुसलमान की लाश को , हिन्दु समझ कर जला तो नहीं दिया होगा ...