1947 हिंदुस्तान का विभाजन : पाकिस्तान आखिर क्या उस समय के लोगों की नज़रों में ?
पाकिस्तान सन 47 में रहने वाले लोगों की नज़रों में
पाकिस्तान बना धर्म के आधार पर
पाकिस्तान न बना तो मुसलमान अछूत रह जायेंगे , पर अछूत तो उस समय हिन्दुओं में भी थे तो उन्हें तो बहुत पहले ही हिंदुस्तान से एक अलग देश बना लेना चाहिए था , पर ये तो न हुआ
डॉ अम्बेडकर ने तो मांग करी थी पर महात्मा गाँधी ने इसका समाधान करने का प्रयत्न किया , भारत के संविधान में बहुत से प्रावधान किये गए और अछूत शब्द का ही उन्मूलन कर दिया गयाजो अछूत हैं ही नहीं उन्हें अछूत कैसे बनाया जा सकता है - जवाब पता नहीं
समझ नहीं आया - क्यों मुसलमान अछूत रहते ( पर पाकिस्तान की मांग करने वालों के शायद इसका जवाब नहीं था )
हिंदुस्तान के आज़ाद होने के बाद क्यों बिना वजह हिन्दू मुसलमानों के और मुसलमान हिन्दुओं के दुश्मन बन जायेंगे - जवाब पता नहीं
पाकिस्तान क्या - छिकुरिया (आधा गांव उपन्यास का एक पात्र) कहता है : शायद कोई मस्जिद होगी अगर मेरे गांव गाज़ीपुर में बनती तो देख लेता
आधा गांव उपन्यास में बच्चों की नज़रों में पाकिस्तान की मांग को देखने की कोशिश की गयी जो इन शब्दों में है :
" लेके रहेंगे पाकिस्तान !"
"इन्किलाब ज़िंदाबाद!'
दुल्ल्न कंधे से स्कूल का बस्ता लटकाये नारा लगते घर में आया |
" पाकिस्तान लेके क्या करिहो जी ? " तन्नू ने पूछा |
" हम का जानें ! " दुल्ल्न ने कहा , " मार लडकवा सब चिल्लाते रहे त हमहूँ कह दिया | "
"अउर पाकिस्तान के साथ इन्किलाब मांग रहयो ? " तन्नू ने दूसरा सवाल किया, " अमें, तूँ कॉंग्रेसी हौ कि लीगी?"
" हम मुसलमान हैं !" दुल्ल्न ने छाती पर हाथ मारकर कहा
[पर दुल्ल्न न तो मुसलमान था न हिन्दू वो तो एक बच्चा था जिसे ये भी नहीं पता था की वो किस चीज़ की और किस लिए मांग कर रहा था ]
एक नवयुवक तन्नू ( आधा गांव उपन्यास का एक पात्र जिसने विश्व युद्ध में एक सैनिक की भूमिका निभाई ) की नज़रों में पाकिस्तान
"तन्नू अपने आप से बोलता हुआ - क्या सचमुच हिंदुस्तानी मुसलमान इस ज़मीन का नहीं है ? मगर दिलदारनगर और गहमर के राजपूत मुसलमान तो इसी मिटटी के बने हुए हैं | फिर वह मुस्लिम लीग को वोट क्यों दे रहे हैं ? वह क्यों एक वतन की ज़रूरत महसूस कर रहे हैं ? राम की खड़ाउँओं को क़दमे-रसूल बनाकर चूमने वाले मुसलमान पाकिस्तान को क्यों बना रहे हैं ? और क्या वह सचमुच पाकिस्तान बनाना चाहते हैं ? क्या वह तमाम लोग , जो मुस्लिम लीग को वोट देंगे , यह जानते हैं कि पाकिस्तान कैसा होगा और क्या होगा ? पाकिस्तान कोई खुदा तो है नहीं की उसे भी बे-देखे मान लिया जाये ! किसी नए मुल्क के नाम को ज़बानों पर चढ़ने के लिए कई नस्लों की ज़रूरत पड़ती है। फिर बीच वाली नस्लों का क्या होगा ? हवा में लटकने वाली इन नस्लों का क्या बनेगा ?
आदमी सिर्फ नफरत , और डर के सहारे ज़िंदा नहीं रह सकता। '
हिन्दुओं का नज़रिया -
जिन मुसलमानों के साथ वह सदियों से रहते चले आ रहे हैं, उनके मकानों में आग क्यों और कैसे लगा दी जाये ? उन मुल्लाजी को कोई कैसे मारे जो नमाज़ पढ़कर मस्जिद से निकलते हैं तो हिन्दू मुसलमान सभी बच्चों को फूंकते हैं ?..... किसी के पास कोई जवाब नहीं था
मुहर्रम में नौहे :
सुगरा मदीना लुट गया
चिल्लाई ज़ैनब पीट सर
सुगरा मदीना लुट गया
मदीना दिल्ली था। मदीना लाहौर था। मदीना हिंदुस्तान था। मदीना पाकिस्तान था - और मदीना लुट रहा था !
पाकिस्तान दो धर्मों को अलग करके नहीं बल्कि कई रिश्तों को अलग करके बना : -
इसने अलग किया पति पत्नी या मियां बीवी को , भाई बहन को , दोस्तों को
मैथिलीशरण गुप्त की कविता मातृभूमि की कुछ पंक्तियाँ
जिसके रज में लोट लोट कर बड़े हुए हैं
घुटनों के बल सरक सरक कर खड़े हुए हैं
क्या हिन्दू या मुसलमान के लिए इस रज को छोड़ना आसान रहा होगा
अंत करूंगा बाल कविता मत बांटो इंसान की कुछ पंक्तियों से
मंदिर मस्जिद गिरिजाघर ने बाँट लिया भगवान को ,
धरती बांटी सागर बांटा , मत बांटो इंसान को
सभी पाठकों का धन्यवाद , सुझाव व् शिकायत सादर आमंत्रित हैं
आधा गांव उपन्यास में बच्चों की नज़रों में पाकिस्तान की मांग को देखने की कोशिश की गयी जो इन शब्दों में है :
" लेके रहेंगे पाकिस्तान !"
"इन्किलाब ज़िंदाबाद!'
दुल्ल्न कंधे से स्कूल का बस्ता लटकाये नारा लगते घर में आया |
" पाकिस्तान लेके क्या करिहो जी ? " तन्नू ने पूछा |
" हम का जानें ! " दुल्ल्न ने कहा , " मार लडकवा सब चिल्लाते रहे त हमहूँ कह दिया | "
"अउर पाकिस्तान के साथ इन्किलाब मांग रहयो ? " तन्नू ने दूसरा सवाल किया, " अमें, तूँ कॉंग्रेसी हौ कि लीगी?"
" हम मुसलमान हैं !" दुल्ल्न ने छाती पर हाथ मारकर कहा
[पर दुल्ल्न न तो मुसलमान था न हिन्दू वो तो एक बच्चा था जिसे ये भी नहीं पता था की वो किस चीज़ की और किस लिए मांग कर रहा था ]
एक नवयुवक तन्नू ( आधा गांव उपन्यास का एक पात्र जिसने विश्व युद्ध में एक सैनिक की भूमिका निभाई ) की नज़रों में पाकिस्तान
"तन्नू अपने आप से बोलता हुआ - क्या सचमुच हिंदुस्तानी मुसलमान इस ज़मीन का नहीं है ? मगर दिलदारनगर और गहमर के राजपूत मुसलमान तो इसी मिटटी के बने हुए हैं | फिर वह मुस्लिम लीग को वोट क्यों दे रहे हैं ? वह क्यों एक वतन की ज़रूरत महसूस कर रहे हैं ? राम की खड़ाउँओं को क़दमे-रसूल बनाकर चूमने वाले मुसलमान पाकिस्तान को क्यों बना रहे हैं ? और क्या वह सचमुच पाकिस्तान बनाना चाहते हैं ? क्या वह तमाम लोग , जो मुस्लिम लीग को वोट देंगे , यह जानते हैं कि पाकिस्तान कैसा होगा और क्या होगा ? पाकिस्तान कोई खुदा तो है नहीं की उसे भी बे-देखे मान लिया जाये ! किसी नए मुल्क के नाम को ज़बानों पर चढ़ने के लिए कई नस्लों की ज़रूरत पड़ती है। फिर बीच वाली नस्लों का क्या होगा ? हवा में लटकने वाली इन नस्लों का क्या बनेगा ?
आदमी सिर्फ नफरत , और डर के सहारे ज़िंदा नहीं रह सकता। '
हिन्दुओं का नज़रिया -
जिन मुसलमानों के साथ वह सदियों से रहते चले आ रहे हैं, उनके मकानों में आग क्यों और कैसे लगा दी जाये ? उन मुल्लाजी को कोई कैसे मारे जो नमाज़ पढ़कर मस्जिद से निकलते हैं तो हिन्दू मुसलमान सभी बच्चों को फूंकते हैं ?..... किसी के पास कोई जवाब नहीं था
मुहर्रम में नौहे :
सुगरा मदीना लुट गया
चिल्लाई ज़ैनब पीट सर
सुगरा मदीना लुट गया
मदीना दिल्ली था। मदीना लाहौर था। मदीना हिंदुस्तान था। मदीना पाकिस्तान था - और मदीना लुट रहा था !
पाकिस्तान दो धर्मों को अलग करके नहीं बल्कि कई रिश्तों को अलग करके बना : -
इसने अलग किया पति पत्नी या मियां बीवी को , भाई बहन को , दोस्तों को
मैथिलीशरण गुप्त की कविता मातृभूमि की कुछ पंक्तियाँ
जिसके रज में लोट लोट कर बड़े हुए हैं
घुटनों के बल सरक सरक कर खड़े हुए हैं
क्या हिन्दू या मुसलमान के लिए इस रज को छोड़ना आसान रहा होगा
अंत करूंगा बाल कविता मत बांटो इंसान की कुछ पंक्तियों से
मंदिर मस्जिद गिरिजाघर ने बाँट लिया भगवान को ,
धरती बांटी सागर बांटा , मत बांटो इंसान को
सभी पाठकों का धन्यवाद , सुझाव व् शिकायत सादर आमंत्रित हैं
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